सौरभ द्विवेदी ने लल्लनटॉप छोड़ा: नया दौर शुरू

  सौरभ द्विवेदी,(Saurabh Dwivedi) हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के चेहरे और द लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक ने इंडिया टुडे ग्रुप से…
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सौरभ द्विवेदी,(Saurabh Dwivedi) हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के चेहरे और द लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक ने इंडिया टुडे ग्रुप से इस्तीफा दे दिया। 12 साल की यात्रा के बाद यह फैसला मीडिया जगत में चर्चा का विषय बन गया है ।

इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा
5 जनवरी 2026 को सौरभ ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “धन्यवाद @TheLallantop ने पहचान, सबक और हिम्मत दी। भविष्य के लिए शुभकामनाएं। यहां मेरा सफर समाप्त। कुछ चिंतन, अवकाश और फिर आगे की राह बताऊंगा।” । इंडिया टुडे ग्रुप ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया और कुलदीप मिश्रा को लल्लनटॉप की संपादकीय जिम्मेदारी सौंपी

यह विदाई सिर्फ एक पद छोड़ना नहीं, बल्कि एक युग का अंत है।

## संभावित कारण: सट्टेबाजी और विवाद
आधिकारिक तौर पर सौरभ ने कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन अटकलें जोरों पर हैं। उनका आखिरी शो (2 जनवरी 2026) बीजेपी शासित मध्य प्रदेश सरकार पर इंदौर जल संकट को लेकर तीखा था, जहां 15 लोगों की मौत हो गई। उन्होंने नेताओं कailash विजयवर्गीय समेत अधिकारियों की लापरवाही उजागर की उसी एपिसोड में बीसीसीआई पर शाहरुख खान को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया। कई विश्लेषकों का मानना है कि संपादकीय दबाव या स्वतंत्रता पर असहमति के कारण यह कदम उठा । हालांकि, सौरभ ने इसे नया सफर बताया है।

लल्लनटॉप की विरासत
2016 में लॉन्च हुए लल्लनटॉप ने सौरभ की देसी भाषा, ग्राउंड रिपोर्टिंग और युवा अपील से हिंदी डिजिटल मीडिया में क्रांति ला दी। आज तक डिजिटल से शुरू कर यह करोड़ों दर्शकों की आवाज बनी । सौरभ ने भारी-भरकम पत्रकारिता को सरल बना दिया, जिससे युवा वर्ग जुड़ा। उनकी विदाई से प्लेटफॉर्म का भविष्य सवालों के घेरे में है।

## आगे की राह: नया वेंचर
सौरभ जल्द ही स्वतंत्र मीडिया प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की तैयारी में हैं। उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू कर दिया है, जहां बेबाक पत्रकारिता जारी रहेगी। ओटीटी या फिल्मों की भी चर्चा है। यह कदम डिजिटल मीडिया में नई होड़ पैदा कर सकता है ।

## मीडिया पर प्रभाव
सौरभ का जाना इंडिया टुडे की डिजिटल दबदबे को चुनौती देता है। हिंदी पत्रकारिता में स्वतंत्रता, दबाव और नई शुरुआत की बहस तेज हो गई | युवा पत्रकारों के लिए यह प्रेरणा है कि सच्चाई और ईमानदारी से नया इतिहास रचा जा सकता है। कुल मिलाकर, यह विदाई नहीं, नई यात्रा का संकेत है |

 

karan Singh

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