2025 में प्रदर्शित हुई “Ajey: The Untold Story of a Yogi” एक साहसिक प्रयास है, जो एक साधु से मुख्यमंत्री बनने की प्रेरक यात्रा को पर्दे पर जीता-जागता बनाती है। यह फिल्म उस युवक अजय सिंह बिष्ट की जीवनगाथा को दिखाती है, जिसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों में से एक योगी आदित्यनाथ का रूप धारण किया।
निर्देशक रविंद्र गौतम ने इस फिल्म की डोर संभाली है, जबकि पटकथा की ज़िम्मेदारी दिलीप बच्चन झा और प्रियंक दुबे ने ली है। निर्माता हैं रितु मेंगी और फिल्म को “Samrat Cinematics” के बैनर तले बनाया गया है।
इस फिल्म की प्रेरणा शांतनु गुप्ता की पुस्तक The Monk Who Became Chief Minister से ली गई है। लेखन की शुरुआत ही इस सवाल से होती है — एक साधु और एक राजनीतिक नेता, कैसे बनता है वह व्यक्ति जिसे “अजेय” कहा जाए?
फिल्म की कथा अजय सिंह के बचपन से आरंभ होती है, जब वह हिमालयी परिवेश में बड़ा होता है। उसमें दिखाया गया है कि कैसे उसकी आस्था, गुरु–शिष्य संबंध, कठोर तपस्या और संघर्ष धीरे-धीरे उसे जनसेवा की ओर ले जाते हैं। इस यात्रा में बाधाएँ, कटु अनुभव, राजनीति की दुनिया, मीडिया, आलोचनाएँ — सब का सामना करना पड़ता है।
मुख्य अभिनेता अनंत जोशी ने अजय/योगी आदित्यनाथ की भूमिका निभाई है। अन्य प्रमुख कलाकारों में परेश रावल (महंत अवैद्यनाथ की भूमिका में), दिनेेश लाल यादव, पवन मल्होत्रा, राजेश खत्तर, गरिमा विक्रांत आदि शामिल हैं।
तकनीकी पक्ष पर बात करें तो छायांकन विश्णु राव ने किया है, संपादन मानन सागर ने, और संगीत बँधा है Meet Bros के हाथों। फिल्म की अवधि लगभग 150 मिनट है।
फिल्म को 19 सितंबर 2025 को थिएटर में रिलीज़ किया गया।
हालाँकि रिलीज़ से पहले यह विवादों में रही — CBFC ने इसे प्रमाणपत्र देने से मना किया था, और निर्माता ने इस निर्णय को चुनौती दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने केस को समीक्षा हेतु लिया।
वित्तीय रूप से, पहले सप्ताह में फिल्म ने लगभग ₹1.5 करोड़ की कमाई की। लेकिन सोमवार को प्रवेश कुछ कम था, लगभग ₹14 लाख।
समिक्षकों ने यह कहा कि फिल्म बड़ी दृष्टि लिए हुए है — प्रदर्शन, निर्देशन और छायांकन की तारीफ हुई, लेकिन आलोचना यह कि कभी-कभी विषय और पॉलिटिक्स ओवरपावर कर देते हैं।
“अजेय” (Ajey) एक साहसिक फिल्म है, जिसने एक विवादित जीवन को निडर होकर बरामद करने की कोशिश की है। यह साधु-राजनीति, सत्ता और आस्था की परतों को खोलने की दलील पेश करती है। चाहे यह पूरी तरह संतुलित हो पाए या नहीं, यह फिल्म चर्चा और संवाद को आमंत्रित करती है — यह दिखाती है कि एक व्यक्ति कैसे अपने अडिग विश्वास और चुनौतियों के बीच “अजेय” बनने की राह चुन सकता है।