अमेरिका के न्यूक्लियर वॉरशिप गेराल्ड में लगी आग, ईरान पर हमले के लिए बतौर बेस इस्तेमाल कर रही है US आर्मी

ईरान जंग में शामिल अमेरिकी नेवी के सबसे बड़े युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड में आग लग गई है. ये युद्धपोत अभी लाल सागर में है. अमेरिकी सेना इस युद्धपोत का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए कर रही है.

ईरान वॉर में शामिल अमेरिका के सबसे बड़े युद्धपोत एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) में आग लग गई है. आग युद्धपोत के मुख्य लाउंड्री में लगी है. दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत में शामिल  USS गेराल्ड आर. फोर्ड इस वक्त लाल सागर में खड़ा है. इस युद्धपोत को अमेरिकी सेना ईरान पर प्रहार करने के लिए बेस के तौर पर इस्तेमाल कर रही है.

अमेरिकी नेवी ने दावा किया है कि आग की वजह युद्ध से जुड़ी नहीं है.

अमेरिकी नेवी का दावा है कि जहाज के प्रोपल्शन प्लांट को कोई नुकसान नहीं हुआ है, और एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह से चालू है. आग की इस घटना में दो अमेरिकी सैनिक जल गए हैं. उनका इलाज किया जा रहा है. अमेरिका के अनुसार ने उनकी जख्म जानलेवा नहीं हैं और उनकी हालत स्थिर है.

गेराल्ड आर. फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अभी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के सपोर्ट में लाल सागर में काम कर रहा है.

सोशल मीडिया वेबसाइट X पर पोस्ट किए गए U.S. सेंट्रल कमांड के एक बयान में अमेरिकी सेना ने कहा है, “12 मार्च को, USS गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN 78) में आग लग गई, जो जहाज़ की मेन लॉन्ड्री की जगह से शुरू हुई थी.” “आग लगने का कारण लड़ाई से जुड़ा नहीं था और उसे काबू कर लिया गया है.जहाज़ के प्रोपल्शन प्लांट को कोई नुकसान नहीं हुआ है और एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह से चालू है. दो नाविकों को अभी मेडिकल इलाज मिल रहा है, जिन्हें जानलेवा चोटें नहीं आई हैं और वे स्थिर हालत में हैं. और जानकारी मिलने पर दी जाएगी.”

एक शिप स्पॉटर के मुताबिक बुधवार तक फोर्ड सऊदी अरब के अल वजह के तट पर लाल सागर के उत्तरी हिस्से में काम कर रहा था. फोर्ड और उसके तीन एस्कॉर्ट्स – USS महान (DDG-72), USS बैनब्रिज (DDG-96) और USS विंस्टन एस. चर्चिल (DDG-81) पिछले हफ़्ते स्वेज़ नहर से क्रॉस कर लाल सागर आए थे.

दुनिया का सबसे बड़ा और महंगा एयरक्राफ्ट

यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे महंगा एयरक्राफ्ट कैरियर है. अमेरिकी नौसेना का यह CVN-78 फोर्ड क्लास का पहला जहाज है, जिसका नाम 38वें राष्ट्रपति गेराल्ड फोर्ड के नाम पर रखा गया. यह 333 मीटर लंबा, 1 लाख टन वजन का न्यूक्लियर पावर्ड सुपर कैरियर है. इसमें दो ए1बी न्यूक्लियर रिएक्टर लगे हैं, जो 30 नॉट से ज्यादा रफ्तार देते हैं. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम (EMALS) है, जो पुराने स्टीम कैटापल्ट से बेहतर है और 90 से ज्यादा फाइटर जेट्स ले जा सकता है. इसकी लागत करीब 13 अरब डॉलर है. अमेरिका ने इसे 2017 में कमीशन किया है. यह अमेरिका की समुद्री ताकत का प्रतीक है.

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